Thursday, June 3, 2010

कभी यूँ भी आ ....

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में
के नज़र को मेरी खबर न हो,

वो बड़ा रहिमों करीम है, मुझे ये सिफत भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ, तो दुआ में मेरी असर न हो
तो दुआ में मेरी असर न हो। - बशीर बद्र

3 comments:

  1. अच्छी पेशकश ....!!! सुन्दर

    http://athaah.blogspot.com/

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  2. मेरी बाजुओं में थॅकी थॅकी भी महवे ख्वाब है चाँदनी
    न सजे सितारों की पालकी, ख़भी ख़त्म ये सफ़र न हो ....

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