Tuesday, June 15, 2010

उसकी मौत



चह चहाती चिड़िया
सर और कन्धों से उडी
और मौसम की हवा
और रंग ले गई

चह चहाती चिड़िया
खेतों से उडी
और फसलों के दाने
बीन ले गई

चह चहाती चिड़िया
गाँव से उडी
और पैरों में
समृद्धि दबा ले गई

चह चहाती चिड़िया
पेड़ पर बैठी
और उसका
बसंत ले गई

चह चहाती चिड़िया
आकाश से गिरी
जमीन पर फडफडाई
और वहीँ मर गई.

- राधेशाम विजघावने

"इबादत"

तू है यार मेरा, तू है प्यार मेरा
तुझे ज़िन्दगी से, मैं कैसे जुदा करूँ

तू है रौशनी, तू है चाँद मेरा
तुझे आँखों से, मैं कैसे दूर करूँ

तू है दिल की धड़कन, तू है साँस मेरी
तुझे कैसे ज़िन्दगी से, अलग मैं करूँ

तू है राज़ मेरा, तू है याद मेरी
तुझे कैसे दिल से, बयां मैं करूँ

तू है दुःख में मेरे, तू ख़ुशी है मेरी
तुझे कैसे अपने से, फ़ना मैं करूँ

तू है आस मेरी, तू आरजू है मेरी
तुझे कैसे ख्वाहिशों से, अलग मैं करूँ

तू मेरी दुआ है, तू इबादत है मेरी
तुझे कैसे खुदा से, माँगा मैं करूँ

Thursday, June 3, 2010

कभी यूँ भी आ ....

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में
के नज़र को मेरी खबर न हो,

वो बड़ा रहिमों करीम है, मुझे ये सिफत भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ, तो दुआ में मेरी असर न हो
तो दुआ में मेरी असर न हो। - बशीर बद्र

अनजान मोड़ .........


क्यों नहीं समझते हैं वो कि हम किस राह में खड़े हैं,
जहाँ चारों तरफ सिर्फ घूरती निगाहों का हुजूम है।

दिल में हमारे हसरतों का अथाह सागर है,
पर इन्हें पूरा करना शायद अब हमारा मुकद्दर नहीं है।

जहाँ हम दोनों के रिश्ते के बीच एक लम्बी दीवार है,
जिसके उस पार देखना शायद अब मुमकिन नहीं है।

बार बार वही प्रश्न क्यों सामने आकर खड़े हो जाते हैं,
जिनके जवाब हाँ होकर भी सदा न पर खत्म होते हैं।

फिर भी वो वही बातें बार बार क्यों किया करते हैं,
जिनके उत्तर हमें बार बार परेशां किया करते हैं।

खुद खुदा जानता है कि हमारी वफ़ादारी क्या है,
पर उन्हें तो बेवफा कह कर रुलाने में मज़ा आता है।