Saturday, October 30, 2010




मेरी ज़िन्दगी में अँधेरे नहीं हैं कुछ कम , फिर क्यों इस जलते चिराग को बुझा रहे हो ?

हँसने का दिखावा तो हम करते है लाखों बार , फिर क्यों इस इक मुस्कराहट को चेहरे से हटा रहे हो ?
.
हुजूम सा दिखता है यूँ तो चाहने वालों का चारों और , फिर क्यों अपने होकर भी गेर से लग रहे हो ?

क्या है मेरा तुम्हारा रिश्ता नहीं जानती हूँ कुछ भी , फिर क्यों बार बार इन रिश्तों का इज़हार करा रहे हो?

दो कदम साथ चलने की सिर्फ की थी तमन्ना, फिर क्यों बीच राह में छोड़ के जा रहे हो?

नहीं हूँ तेरे प्यार के काबिल पता है मुझे ऐ दोस्त, फिर क्यों इस दोस्ती को आगे बड़ा रहे हो ?

नफरत भी करना चाहो न कर सकोगे मुझसे, फिर क्यों दिल में अपने नफरत जगा रहे हो ?

खुश रहे तू सदा बस यही इल्तिजा है , फिर क्यों बेवाज़ा खुद को ग़मों में डूबा रहे हो ?

Tuesday, June 15, 2010

उसकी मौत



चह चहाती चिड़िया
सर और कन्धों से उडी
और मौसम की हवा
और रंग ले गई

चह चहाती चिड़िया
खेतों से उडी
और फसलों के दाने
बीन ले गई

चह चहाती चिड़िया
गाँव से उडी
और पैरों में
समृद्धि दबा ले गई

चह चहाती चिड़िया
पेड़ पर बैठी
और उसका
बसंत ले गई

चह चहाती चिड़िया
आकाश से गिरी
जमीन पर फडफडाई
और वहीँ मर गई.

- राधेशाम विजघावने

"इबादत"

तू है यार मेरा, तू है प्यार मेरा
तुझे ज़िन्दगी से, मैं कैसे जुदा करूँ

तू है रौशनी, तू है चाँद मेरा
तुझे आँखों से, मैं कैसे दूर करूँ

तू है दिल की धड़कन, तू है साँस मेरी
तुझे कैसे ज़िन्दगी से, अलग मैं करूँ

तू है राज़ मेरा, तू है याद मेरी
तुझे कैसे दिल से, बयां मैं करूँ

तू है दुःख में मेरे, तू ख़ुशी है मेरी
तुझे कैसे अपने से, फ़ना मैं करूँ

तू है आस मेरी, तू आरजू है मेरी
तुझे कैसे ख्वाहिशों से, अलग मैं करूँ

तू मेरी दुआ है, तू इबादत है मेरी
तुझे कैसे खुदा से, माँगा मैं करूँ

Thursday, June 3, 2010

कभी यूँ भी आ ....

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में
के नज़र को मेरी खबर न हो,

वो बड़ा रहिमों करीम है, मुझे ये सिफत भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ, तो दुआ में मेरी असर न हो
तो दुआ में मेरी असर न हो। - बशीर बद्र

अनजान मोड़ .........


क्यों नहीं समझते हैं वो कि हम किस राह में खड़े हैं,
जहाँ चारों तरफ सिर्फ घूरती निगाहों का हुजूम है।

दिल में हमारे हसरतों का अथाह सागर है,
पर इन्हें पूरा करना शायद अब हमारा मुकद्दर नहीं है।

जहाँ हम दोनों के रिश्ते के बीच एक लम्बी दीवार है,
जिसके उस पार देखना शायद अब मुमकिन नहीं है।

बार बार वही प्रश्न क्यों सामने आकर खड़े हो जाते हैं,
जिनके जवाब हाँ होकर भी सदा न पर खत्म होते हैं।

फिर भी वो वही बातें बार बार क्यों किया करते हैं,
जिनके उत्तर हमें बार बार परेशां किया करते हैं।

खुद खुदा जानता है कि हमारी वफ़ादारी क्या है,
पर उन्हें तो बेवफा कह कर रुलाने में मज़ा आता है।



Tuesday, May 25, 2010

फिर भी .......

हर तरफ आज आदमी रिश्तों से घिरा बैठा है,
फिर भी भीड़ में अकेला सा क्यों है।
हर तरफ आज फिजाओं में रौशनी सी है,
फिर भी धुंद सा घना धुआं क्यों है।
हर तरफ खुशियों की बहारें ही बहारें हैं,
फिर भी दिल आज उदास उदास सा क्यों है।
हर तरफ आज पूर्णिमा की चांदनी सी है,
फिर भी दिल में अमावस सा अँधेरा क्यों है।
हर तरफ फुहारें आने को लगती है,
फिर भी मौसम तीव्र ग्रीष्म सा क्यों है।
हर तरफ हरियाली ही हरियाली है,
फिर भी यहाँ सूखा सूखा सा क्यों है।
हर तरफ हम मुस्कुराने के बहाने ढूँढ़ते है,
फिर भी दिल में दर्द दबा दबा सा क्यों है।
हर तरफ प्यार की छठा बिखेरतें है,
फिर भी दिल प्यार को तरसता क्यों है।
हर तरफ प्यार और दुआओं का मजमा लगा है,
फिर भी खुदा की बंदगी क्यों दिखती नहीं है।

Thursday, May 20, 2010

रास्ता

ये किन रास्तों पर चल पड़े हैं हम, खुद नहीं जानते हैं
न पता न है ठिकाना किस रह पर चल पड़े हैं।

उन अनजान उबड़ खाबड़ रास्तों की राह में कोई है
जहाँ जब भी हम गिरते हैं कोई आकर संभाल लेता है।

दिल में प्यार का बेशकीमती खज़ाना लेकर निकल पड़े हैं
जिसे किसी के लूटने या लुटवाने का भी डर नहीं है।

इन रास्तों में चलते हुए किसी से तकरार भी बहुत होती है
पर उतनी ही इसमें प्यार की उम्र भी बड़ी होती है।

चलते चलते ख्यालों में न जाने क्या क्या बातें करते हैं
पर किसी की एक आवाज़ सुनकर सब कुछ भूल जाते हैं।

पता नहीं वह क्या है जो पहुँच से बहुत दूर है
पर लगता है जैसे दिल के बहुत करीब है।

यह सोच की उड़ान मेरे ख्वाबों में अक्सर दस्तक देती है
ये क्या है जो रूह को रूह से एक किया करती है।

यह रास्ते क्यों कर इतने लम्बे लम्बे से हैं
जहाँ निरंतर चलते हुए भी सफ़र खत्म होता नहीं है।

नहीं है इन रास्तों में फिर भी क्यों कर ऐसा लगता है
जैसे कोई हमदम-हमसफ़र साथ साथ चल रहा है।

चलते चलते अचानक एक अनकहा अनछुआ एहसास हुआ है
जहाँ खट्टी मीठी बातों की एक प्यारी सी कसक है।