जब भी देखा, जहाँ भी देखा
बस तू ही तू नज़र है आया।
बंद पलकों में, दुआ में अपनी
बस तुझे ही सामने है पाया।
कितना प्यारा, ये पावन सा
रब ने ये रिश्ता है बनाया।
न कोई मंजिल न है ठिकाना
वक्त ने फिर भी, हमें है मिलाया।
उन मोड़ों पर, जो बहुत कठिन थे
हर उस मोड़ पर, तुझे मैंने है पाया।
गिर के संभालना, और फिर उठाना
आपने ही हमें, हरदम है सिखाया।
कैसे करना, सपनो को है पूरा
वक्त वक्त पर आपने हमें है सिखाया।
जब रास्ते पर, चलना था मुश्किल
तब सही रास्ता आपने हमें है दिखाया।
हमसे अपना ही भरोसा, जब टूट रहा था
तब आगे बढकर, हमारा हौसला है बढाया।
निराशा के समंदर में, डूबे थे जब हम
साहिल बनकर, किनारा हमें है दिखाया।
जब हो रहे थे, खुशियों से परे हम
बात बात पर हँसना हमें है सिखाया।
जब भी दुःख तकलीफों ने हमें सताया
हरदम हमसफ़र, तुझे साथ है पाया।
नज़र न लगे, हमारे इस रिश्ते को
जिसे हमने विश्वास की डोर से है पिरोया।
बस यही अब इक इल्तिजा है हमारी
ये साथ यूँ ही रहे सदा, ऐ खुदाया।
bahut achchi rachna
ReplyDeletewelcome in blog world
with regard
pradeep
अति सुन्दर...
ReplyDeleteapki dua kabul kare khuda yahi hai apni bhi duaa
ReplyDeleteसुंदर रचना।
ReplyDeleteचिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। हिंदी ब्लागिंग को आप और ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है।
यहां पधार सकते हैं -
http://gharkibaaten.blogspot.com
शानदार अपनी लेखनी को जारी रखें। शुभकामनाओं सहित।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश, सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) (जो दिल्ली से देश के सत्रह राज्यों में संचालित है। इसमें वर्तमान में ४२८० आजीवन रजिस्टर्ड कार्यकर्ता सेवारत हैं।)। फोन : ०१४१-२२२२२२५ (सायं : ७ से ८)
ReplyDeleteसीधी, सच्ची, अच्छी निश्चल सोच तथा अभिव्यक्ति - शुभकामनाएं
ReplyDeleteउत्तम लेखन… आपके नये ब्लाग के साथ आपका स्वागत है। अन्य ब्लागों पर भी जाया करिए। मेरे ब्लाग "डिस्कवर लाईफ़" जिसमें हिन्दी और अंग्रेज़ी दौनों भाषाओं मे रच्नाएं पोस्ट करता हूँ… आपको आमत्रित करता हूँ। बताएँ कैसा लगा। धन्यवाद...
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