Wednesday, May 12, 2010

दोस्त



ऐ दोस्त तेरी दोस्ती का रिश्ता बहुत गहरा है
न जाने किस उम्मीद पर दिल ठहरा है।


ऐ दोस्त यह रूह से रूह की गहराईयों का रिश्ता है
जो रिश्तों से परे मोहब्बत की डोर से बंधा है।


ऐ दोस्त यह एक प्यारा सा मासूमियत का रिश्ता है
जिसमे रूठकर मनाने का एक सिलसिला है।


ऐ दोस्त यह पाक इरादों का रिश्ता है
जिसमे दिल हर वक्त तेरी खुशियों की दुआ करता है।


ऐ दोस्त यह एक गुमनाम सा रिश्ता है
जो लोगों की रुस्वायिओं से डरता है।


ऐ दोस्त यह तेरा नहीं न ही मेरा रिश्ता है
यह तो उस खुदा का प्यारा सा रिश्ता है।


ऐ दोस्त यह दूरियों और फासलों से परे का रिश्ता है
जिसमे हरदम तू ही तू मेरे पास हुआ करता है।


ऐ दोस्त यह उन ख्वाहिशों और तमन्नाओं का रिश्ता है
जिसमे दिल हर वक्त तुझसे मिलने की दुआ करता है।


ऐ दोस्त यह ख्यालों में खुदा को पाने का रिश्ता है
क्योंकि खुद खुदा ही तुझमे दिखता है।

2 comments:

  1. किताबों में पढने को तो मिली है, लेकिन व्यवहार में देखने को मुझे आज तक ऐसी दोस्ती का कभी भी अहसास नहीं हुआ। यदि आपके जीवन में कोई ऐसा दोस्त है, तो आप भाग्यशाली हैं। इसके उपरान्त भी ऐसा लगता है कि आपकी पंक्तियों में कल्पना या फिर भावनात्मकता का उबाल अधिक है। जो भी आपके जीवन में ऐसा सौन्दर्यमयी खुशगवार माहौल हमेशा बना रहे ऐसी शुभकामनाओं सहित।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश, सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) (जो दिल्ली से देश के सत्रह राज्यों में संचालित है। इसमें वर्तमान में ४२८० आजीवन रजिस्टर्ड कार्यकर्ता सेवारत हैं।)। फोन : ०१४१-२२२२२२५ (सायं : ७ से ८)

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  2. Purushottamji apka housla afzai ke liye bahut bahut shukriya. Meine apne jeevan mein bahut kuch dekha aur saha hai, aur isse kafi kuch seekha hai, jinhe meine kavita mein pirone ki koshish ki hai, meine apna blog haal hi mein shuru kiya hai, aage bahut kuch isper post karna chahti hun, aasha karti hun apki hounsa afsai yun hi milti rahegi. With warm regards.

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